मानसून में गोवा जाना – सही या गलत, जानें



Goa in Manson season

हेलो दोस्तों  आप सभी कभी ना कभी गोवा गए तो होंगे या गोवा जाने की प्लानिंग तो कर ही रहे होंगे। वैसे गोवा जैसी जगह कौन नहीं जाना चाहेगा, आज की युवा पीढ़ी की पहली पसंद है गोवा।

Goa in Manson | Beaches
तो दोस्तों आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ गोवा के कुछ अनछुए पहलू। वैसे गोवा जाने का बैस्ट टाइम होता है अक्टूबर से मार्च और दुनिया भर के लोग उसी समय गोवा जाना पसंद करते हैं। और जून से अगस्त यानि मानसून के समय गोवा का सीज़न आफ होता है, मतलब इस समय वहाँ बहुत कम ही लोग जाते हैं, कारण इस दौरान वहाँ बहुत बारिश होती है, ज्यादातर बीच बंद हो जाते हैं, क्लब, मार्केट, और एंटरटेनिंग एक्टिविटी भी लगभग बंद ही रहती है। जब लोग ही नहीं होंगे तो गोवा में ग्लैमर कहाँ से आएगा जिसको देखने आप और हम जाते हैं।
लेकिन अभी कुछ दिन पहले मैने गोवा जाने का प्लान बनाया, और फिर लोगों से पूछना चालू किया, इंटरनेट पर सर्च किया, सभी लोगों ने और इंटरनेट पर भी इस समय ( मानसून ) वहाँ जाने के लिए मना ही किया, लेकिन हम ठहरे मनमौजी किस्म के इंसान , तो मैने सोचा कि क्यों ना कुछ अलग किया जाए, फिर क्या था उठाया फोन और कर डाली गोवा की ट्रेन की टिकट। चूंकि मानसून सीजन है तो ए सी की जगह स्लीपर की ही टिकट करवा ली जो कि एक समझदारी वाला फैसला भी रहा, पैसे भी बचे और मजा भी आया।



Goa in Manson | Popular beaches

भाई लोगों जब मैने टिकट करवा दी तो सभी यही बोल रहे थे कि इस समय तुम बेकार जा रहे हो, लेकिन मैं कुछ एडवेंचर पंसद इंसान हूँ, लोग जितना मना कर रहे थे मेरा मनोबल उतना ही बढ़ रहा था।
तो भाई में 4 जुलाई को बैग लेके निकल गया ( दिल्ली से )और 6 जुलाई को गोवा की जमीन पर पैर रख दिया जो कि गीली थी। अब समय आ गया था ये देखने का कि मेरा फैसला सही था या गलत। बारिश तो महाराष्ट्र आते ही शुरू हो गई थी, मौसम एकदम रंगीन था। मैं पूरे समय ट्रेन की खिड़की पर ही चिपका रहा।


तो फिर मैं 6 जुलाई को सुबह 12 बजे गोवा ( थिविम रेल्वे स्टेशन ) पहुंच गया, उपर काले बादल और ठंडी हवा चल रही थी। उफ्फ क्या मौसम था। फिर वहाँ से आटो पकड़ के कलंगुड बीच पहुँच गया। मानसून में नार्थ गोवा ही खुला रहता है, इसलिए इस समय कंलगुड, बागा, कंडोलिम, अंजुना बीच जाना ही बेहतर रहता है, जहाँ कुछ लोग मिल जाएंगे आपको।


मैने घर से निकलने से पहले ही होटल बुक कर लिया था चार दिन तीन रात के लिए। जब मैं कंलगुड स्थित अपने होटल पहुंचा तो चौंक गया, इतने कम पैसे में इतना शानदार होटल, अरे वाह मजा आ गया, भाई आफ सीज़न में जो गया था, बढियां होटल भी सस्ते मिलने ही थे। मैने होटल 1400 एक दिन के हिसाब से बुक किया था, जब मैने वहाँ पता किया तो पता चला कि मानसून के बाद यहाँ यही कमरा आपको 3500 से कम नहीं मिलेगा, ये सुनकर लगा मानो मेरी लाटरी सी लग गई हो। मानसून में गोवा आने के फायदे मुझे मिलना शुरू हो चुके थे।
ये तो रही होटल की बात, होटल से फ्री होके मैं कंलगुड की तरफ पैदल निकल लिया और फिर हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, मार्केट खुले हुए थे, बारिश की वजह से लोग भी कम थे। फिर एक रेस्टोरेंट में हल्ला फुल्का खाना खाया जो कि सस्ता भी था और समय के मुकाबले। फिर मैं निकल लिया कंलगुड बीच की तरफ, बारिश से बचता बचाता।


बीच पर पहुँचने पर वहा का अलौकिक नजारा देख में रोमांचित हो उठा। उपर घने काले बादल और नीचे उफान लेता समुद्र। मानसून के दौरान समुद्र की लहरें ज्यादा ऊंची उठती है इसलिए वहाँ कोस्ट गार्ड बार बार एनाउसमेंट कर रहे थे कि समुद्र के अंदर ना जाए और ऐसा करने पर जुर्माने का प्रावधान भी था। भीड़ कम थी जिससे वहाँ घूमने में भी आसानी हो रही थी और माहौल तो एकदम फिल्मों वाला था। तेज हवाएँ चल रही थी, रूक रूक कर तेज बारिश हो रही थी, लहरें तेजी से हमारी तरफ़ आके लौट जा रही थी, भाई मैंने समुद्री बीच का इतना रोमांटिक माहौल पहले कभी नहीं देखा। बीच पर रैस्टोरेंट भी खुले हुए जहाँ बीयर, वोडका, सबकुछ मिल रहा था वो भी और दिनो से सस्ते में।
मैने ऐसे ही बाकी के बीचों पर गया, बागा, अंजुना, वागाटोर बीच, सभी जगह माहौल रंगीन और भीगाभीगा सा था। सायंकालीन बाजारों में अच्छी रौनक थी लोग कम थे इसलिए बाजार घूमने में मजा भी आ रहा था। हर जगह डिस्काउंट मिल रहा था। कुछ एक डांस क्लब भी खुले हुए थे लेकिन वहाँ कुछ ही लोग बैठे हुए थे तो मैं वहाँ रूका ही नहीं क्योंकि क्लब जैसी जगहों पर तो भीड़ से ही मजा आता है। और अगर आप कैसिनो के शौकिन है तो आपको पणजी जाना पड़ेगा जो वहाँ से केवल 12 किलोमीटर की दूरी पर है। लोकल राइडिंग के लिए आपको स्कूटी, बाइक आराम से मिल जाएंगी जिनका किराया मात्र 350 रूपये दिन का है।
अब मैं बात करता हूँ मानसून में गोवा जाने के फायदे और नुकसान के बारे में:
फायदे – सस्ते होटल एंव सस्ता खाना, ठंडा मौसम, बारिश का मजा, बीच के शानदार नजारे, ट्रैफिक भी कम, बाजार की शापिंग भी सस्ती, कुल मिलाकर एडवेंचरफुल एक्सपिरियन्स।
नुकसान  – डांस क्लब, नाइट क्लबों में एक्टिविटी कम मिलेगी, वाटर एक्टिविटी नहीं मिलेगी।
मानसून में कहाँ जाया जा सकता है – मानसून में नार्थ गोवा जाना बेस्ट है। कंलगुड, बागा, कंडोलिम, अंजुना, वागाटोर, फोर्ट अंगुंडा जाना बेहतर है।
अब कुल मिलाकर मेरी राय यही है कि अगर आप भी गोवा जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो मानसून के सीज़न में जाएं, सस्ता भी लक्जरी भी।
कैसे जाएं – नार्थ गोवा का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है ” थिविम “। थिविम के लिए आपको देश कहीं से भी रेल आराम से मिल जाएंगी, या फिर आप हवाई जहाज से भी आ सकते हो।
सावधानी – मोबाइल, पर्स पोलिथिन में कवर करके रखें, रैनकोट साथ में लेके चलें जो वहाँ आराम से मिल भी जाएंगे।
 ठहरना – ठहरने के लिए आपको कंलगुड, कंडोलिम, बागा एरिये में सभी तरह के होटल मिल जाएंगे। मंहगे, सस्ते, अच्छे।

Agra-Delhi-Jaisalmer-Bikaner flight from 15 August

Zoom Airways

ट्रैवल डेस्क : अब आगरा से दिल्ली, जेसलमेर और बीकानेर फ्लाइट से जा सकेंगे, 15 अगस्त से जूम एयर कंपनी द्वारा फ्लाइट सुविधा शुरू की जा रही है।


अभी आगरा की अन्य शहरों से एयरकनेक्टिवी नहीं है, ऐसे में रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम के तहत जूम एयर कंपनी द्वारा आगरा दिल्ली जेसलमेर, बीकानेर फ्लाइट शुरू की जा रही है। यह सप्ताह में तीन दिन आएगी।
सप्ताह में तीन दिन आएगी फ्लाइट : आगरा दिल्ली जेसलमेर, बीकानेर फ्लाइट सप्ताह में तीन दिन आएगी, यह गुरुवार, शनिवार और रविवार को आगरा आएगी। एयरपोर्ट डायरेक्टर विनोद कुमार सिंह का कहना है कि 15 अगस्त से जूम एयर कंपनी की फ्लाइट शुरू हो जाएगी।
यह रहेगा आने का शिडयूल –
दिल्ली से सुबह 7 .45 बजे चलकर आगरा 8 .45 बजे पहुंचेगी
आगरा से 9. 15 बजे चलकर जेसलमेर 10 .45 बजे पहुंचेगी
जेसलमेर से 11 .45 से बीकानेर 12 बजे पहुंचेगी
इसी तरह से वापस आएगी –
12. 30 बजे बीकानेर से जेसलमेर के लिए 1 .15 बजे पहुंचेगी
1 .45 बजे जेसलमेर से आगरा चलकर 3 .15 बजे आगरा पहुंचेगी
3 .45 बजे आगरा से उडान भरकर 4. 45 बजे दिल्ली पहुंचेगी
तीन अगस्त से दिल्ली वाराणसी आगरा खजुराहो फ्लाइट
आगरा के लिए दिल्ली वाराणसी आगरा खजुराहो फ्लाइट बंद चल रह है, इसके भी तीन अगस्त तक शुरू होने की उम्मीद है।

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विदेश जाना चाहते हों तो जाएं इस वीजा मंदिर, एक साल में पहुंच जाएंगे विदेश


चिलकुर बालाजी मंदिर, हैदराबाद में वीजा मंदिर के नाम से फेमस है। यहां हजारों लोग रोज अपना वीजा क्लियर होने का दुआ मांगने आते हैं।
ट्रैवल डेस्क। चिलकुर बालाजी मंदिर।हैदराबाद से 30 किमी दूर। उस्मान सागर लेक पर बने इस मंदिर में एक खास वजह से श्रद्धालु आते है। और वो वजह है वीजा। दरअसल, यहां रोज हजारों भक्त भारत से बाहर जाने के लिए अपना वीजा क्लियर होने की दुआ मांगने आते हैं। लगभग 20 साल पहले कुछ कंप्यूटर प्रोफेशनल्स को इस मंदिर में देवी के दर्शन करने के बाद अमेरिका जाने का वीजा मिल गया था। तभी से इस मंदिर में लोगों का आना शुरू हो गया।


जानिएक्या है मान्यता.. – कहा जाता है कि चिलकुर बालाजी के दर्शन करने से जो लोग देश से बाहर जाना चाहते हैं उनका वीजा जल्दी बन जाता है। – मान्यता है कि अगर भक्त राजस्थान के तिरुपति बाला जी नहीं जा पाते तो उन्हें चिलकुर बाला जी के दर्शन से तिरुपति के बराबर फल मिलता है।


क्या कहा जाता है इस मंदिर के बारे में…    ये मंदिर वीजा मंदिर के नाम से फेमस है जहां खासकर यंग लोग आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भी IT प्रोफेशनल यहां दर्शन के लिए आया उसे एक साल के अंदर ही अमेरिका जाने का अवसर मिल गया। यहां आने वाले भक्त अपनी इच्छा मन में लेकर इस मंदिर के 11 चक्कर लगाते हैं। इसके बाद जब भी उनकी इच्छा पूरी हो जाती है, वो वापस आकर मंदिर के 108 चक्कर लगाते हैं। यहां लगभग 8 से 10 हजार स्टूडेंट्स आते हैं। एक सप्ताह मे लगभग 1 लाख भक्त यहां दर्शन करने आते हैं उनमें से ज्यादातर अमेरिका और दूसरी वेस्टर्न देशों के वीजा की इच्छा लेकर आते हैं। यहां आने वाले लोगों में सभी तरह के लोग आते हैं जो ठीक से चल नहीं सकते, बीमार, छोटे बच्चों के साथ महिलाएं।


5000 साल पुराना है ये मंदिर…    इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि एक बार एक बूढ़ा आदमी तिरुपति बालाजी के दर्शन करने निकला पर उम्र ज्यादा होने की वजह से नहीं जा पाया। एक रात इसके सपने में वेंकटेश्वर स्वामी आए और उसे चिलकुर में एक खास जगह पर खोदने को कहा। उस आदमी ने ऐसा ही किया। खोदते समय अचानक से उसे किसी के रोने की आवाज आई। खोदने पर एक पत्थर जैसा कुछ टकराया। जब उसे निकाला गया तो वो वेंकटेश्वर स्वामी की एक मूर्ति थी जिसके सिर में से खून निकल रहा था। वहीं ये बालाजी का मंदिर बना। ये मंदिर भगवान बालाजी और उनकी पत्नी श्री देवी और भू-देवी को समर्पित है। यह मंदिर 5000 साल पुराना है और हैदराबाद का सबसे पुराना मंदिर है।




नहीं लिया जाता है यहां दान    ये इंडिया के कुछ ही ऐसे मंदिरों में से एक है जिसमें किसी भी तरह का दान नहीं लिया जाता। आपको यहां कोई दान पेटी नहीं मिलेगी। इस मंदिर का रखरखाव और खर्च यहां आनें वाले भक्तों से ली गई पार्किंग फीस से किया जाता है। साथ ही मंदिर की एक मैगजीन चलती है जो 5 रूपए की होती है। मिनिस्टर ऑफ ओवरसीज इंडियन अफेयर्स (MOIA) के अनुसार, जनवरी 2015 में 5,42,10,052  इंडियन दूसरे देशों में थे इनमें से ज्यादातर लोग आंध्रप्रदेश के थे। इस मंदिर में आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के लोग रेग्युलर आते हैं। यहां कोई भी VIP नहीं होता।


कैसे पहुंचे    ऐड्रेस:  चिलकुर मंदिर, चंदा नगर, टेंपल रोड, हैदराबाद, तैलंगाना    समय: सुबह 5 बजे से रात 8 बजे तक।    By Air यहां का नजदीकी एयरपोर्ट हैदराबाद का बेगमपेट एयरपोर्ट (HYD) है जो मंदिर से 20 किमी दूर है। यहां सभी बड़ी सिटी से फ्लाइट्स आती हैं।    By Train यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन है लिंगमपल्ली जो  यहां से 14 किमी दूर है। यहां सभी बड़ी सिटी से ट्रेन आती हैं।    By Road यहां के लिए आंध्रप्रदेश की सभी सिटी से बस (APSRTC) मिलती हैं।

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दुनिया में छोटे ताजमहल के नाम से विख्यात है ये मकबरा, सच्चाई जानकार हैरान रह जाएंगे आप



कई बार ऐसा होता है कि किसी जगह को देखकर हमें किसी और जगह की याद आ जाती है. हमें लगता है कि ये जगह तो हमने कहीं देखी है. जैसे, आप किसी हिलस्टेशन पर जाते हैं, तो आपको वहां के नजारे देखकर किसी और हिलस्टेशन का ख्याल आता होगा. ऐसी ही एक जगह है बीबी का मकबरा, जिसे देखकर आपको लगेगा कि आप आगरा का ताजमहल देख रहे हैं. बीबी के मकबरे को छोटे ताजमहल के नाम से जाना जाता है और ये महाराष्ट्र के ताजमहल के नाम से भी विख्यात है।


यह मकबरा महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित है. शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज के लिए आगरा में ताजमहल बनवाया था, जिसे देखा देखी औरंगजेब के बेटे और शाहजहां के पोते आजम शाह ने ताजमहल से प्रेरित होकर अपनी मां दिलरास बानो बेगम की याद में बीबी का मकबरा बनवाया. इसका निर्माण 1651 से 1661 ईसवीं के बीच करवाया गया था. इसे देश का दूसरा ताजमहल भी कहते हैं.
7 लाख रुपये की लागत से बना :: ऐसा कहा जाता है कि इसे बनवाने का खर्च तब 700,000 रुपए आया था, जबकि ताजमहल बनवाने का खर्च उस समय 3.20 करोड़ रुपए आया था. यही वजह है कि बीबी का मकबरा को ‘गरीबों का ताजमहल’ भी कहते हैं. आगरा के ताजमहल को शुद्ध सफेद संगमरमर से बनवाया गया था, वहीं बीबी का मकबरा का गुम्बद संगमरमर से बनवाया गया था. मकबरा का बाकी हिस्सा प्लास्टर से तैयार किया गया है, ताकि वह दिखने में संगमरमर जैसा हो।

ये है खास आकर्षण :: बीबी के मकबरा में सुंदर गार्डन, पॉन्ड्स, फव्वारे, झरने हैं. यहां पर अच्छा खासा पाथ-वे है और इसके गार्डन की दीवारें भी ऊंची बनाई गई हैं ताकि बाहर का व्यक्ति अंदर न देख सके. इसके तीन साइड में ओपन पवेलियन है.
अब यहाँ कैसे पहुंचा जा सकता है हम ये भी आपको बताते हैं ::  बस से आने वाले यात्री राज्य के किसी भी शहर से कम दाम में औरंगाबाद यानि सिटी ऑफ गेट तक आ सकते है. शहर में भ्रमण करने के लिए भी कई बसें चलती है, जो पर्यटकों को पूरे शहर में घूमा सकती है.  यहां से 120 किमी. दूर रेलवे स्टेूशन है जिसे मनमाद रेलवे स्टेसशन कहा जाता है. यहां से औरंगाबाद तक 900 रूपए में प्राइवेट टैक्सीे से पहुंचा जा सकता है. औरंगाबाद में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो देश के सभी प्रमुख शहरों और राज्यों से जुड़ा हुआ है. मुंबई, नासिक, शिरडी, पुने, शनिसिंगणापुर, लातूर, नांदेड़ जैसे बड़े शहरों से आपको सीधे तौर साधन आसानी से मिल जाएंगे।


कब जाएं :: औरंगाबाद में गर्मी के दौरान न आएं. गर्मियों के मौसम में यहां का वातावरण बेहद गर्म और बॉडी को दिक्कनत देने वाला होता है.  इस शहर को घूमने का बेस्ट‍ मौसम सर्दियों का है. इस दौरान यहां का न्यूइनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहता है. अक्टूसबर से मार्च तक यहां बड़ी तादाद में लोग घूमने आते हैं. वहीं आप यहां मानसून में भी घूम सकते हैं.
टिकट ::   यहां घूमने के लिए भारतीयों के लिए 10 रुपए का टिकट है. वही विदेशी नागरिकों के लिए 250 रुपए का टिकट है.
तौर फिर देर ना करिये बैग पैक करिए और निकल जाइये छोटे ताजमहल के दीदार के लिए।


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चाट के लिए बहुत खास आगरा, चटोरों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है ये शहर



सात अजूबों में से एक ताजमहल उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित है, जो पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है, देशी हो या विदेशी हर कोई आगरा में रहते हुए ताजमहल का दीदार करना चाहता है। लेकिन क्या कभी आपने ताजमहल घूमने के अलावा आगरा की गलियों में घूमते हुए वहां के लजीज व्यंजनों का मजा लिया है।हर राज्य और हर शहर के अलग अलग व्यंजन लोकप्रिय होते हैं,जैसे जयपुर की प्याज की कचौरी, दिल्ली की चाट तो मुंबई की भेलपूरी ठीक वैसे ही आगरा का पैठा बहुत मशहूर है। आगरा के पैठे से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन कई और भी लजीज व्यंजन है जो आपको अपनी आगरा ट्रिप पर अवश्य चखने चाहिए।
पेठा :: आप पेठा यूं तो कहीं से भी खरीद सकते हैं, लेकिन आगरा जैसा पैठा शायद ही नहीं मिले। आगरा में पैठा की कई वैरायटी मिलती हैं, जैसे सफेद, पीला, केसर, गुलाब, अनानास, स्ट्रॉबेरी, आम और पान पेठा आदि, तो अपनी अगली ट्रिप पर यहां के पैठे को खाना कतई ना भूलें। पंछी पेठा, प्राचीन पेठा, गोपालदास पेठे वाले यहाँ के जाने माने नाम हैं। शहर के प्रमुख चौराहों में आपको इनकी दुकाने मिल जाएंगी। नकली नामो से आपको सावधान रहना पड़ेगा।

 


चटनी संग पराठा :: आप सोच रहे होंगे कि ये तो हम अपने घर पर भी बना सकते हैं, इसमें ऐसा क्या खास है, तो जनाब खास है, क्यों कि, आगरे का भरवा परांठा सिर्फ आलू से नहीं बल्कि पनीर और अन्य सब्जियों को भरकर बनाया जाता है, जिसे पनीर, चटनी या फ‍िर दही के साथ खाया जाता है । खाकर जरुर देखियेगा। अगर आप आगरा के परांठे खाने के लिए बेताब है तो आप रामबाबू पराठे वाले के यहाँ जाइए, ये एक सुप्रसिद्ध रेस्टोरेंट है जहाँ आपको सिर्फ 110 तरह के सिर्फ परांठे ही मिलेंगे। तो सोचो मत एक बार जरूर जाओ। और एक बात ध्यान रखें, नकली नामों से सावधान।

चाट समोसा :: दिल्ली की चाट से तो सभी वाकिफ है, लेकिन आगरा की चाट भी कम मशहूर नहीं है, आगरे की चाट सिर्फ चटपटी ही नहीं बेहद लजीज भी होती है। इसके अलावा यहां के दही भाल, समोसा ,पनीर समोसा, पनीर आलू टिक्की और गोल गप्पे खासा लोकप्रिय है। आगरा में सेठ गली, सदर बाजार सेंट जोंस चौराहा, देहली गेट, भगवान टाकीज, खंगार, शाहगंज और ऐसे ही प्रमुख बाजारों में आपको एक से एक स्वादिष्ट चाट टिक्की मिल जाएगी। बेहतर समय शाम होने के बाद।


जलेबी बेढ़ई :: चाशनी में लबालब तैरती हुई गर्म गर्म जलेबी दही के साथ बेहद लजीज स्वाद देती है, इसके उल्ट बेढ़ई आगरा में सुबह सड़कों के क‍िनारे सुबह के नाश्‍ते में मिलती है। बेढ़ई के दो भाग होते हैं। इसका एक भाग काफी स्‍पाइसी और दूसरा मीठा होता है। यहां पर यह बेढई आलू की चटपटी सब्‍जी, हरी चटनी और दही के साथ परोसी जाती है। खासतौर पर भगत हलवाई, देवीराम हलवाई, गोपालदास, सत्तोलाला, ब्रजवासी हलवाई प्रसिद्ध नाम है जहाँ आप अपनी उंगलियों को चाटने के लिए मजबूर हो जाओगे। वैसे तो जलेबी बेढ़ेई आपको पूरे शहर में कहीं भी स्वादिष्ट मिल जाएंगी लेकिन ये आगरा शहर का नाश्ता है इसके लिए आपको सुबह सुबह ही जाना पड़ेगा।


नानवेज व्यंजन :: नॉन वेज खाने के शौकीनों के लिए तो आगरा जन्नत से कम नहीं है। मुगलों की राजधानी रह चुका आगरा में मुगलाई चिकन,चिकन टिक्का, तन्दूरी चिकन आदि लजीज व्यंजन खाने के बाद आप उंगली चाहते रह जायेंगे। आगरा में नाई की मंडी का चिकन मटन मार्केट, सदर मार्केट का मामा फ्रेंकी, चावला चिकन, अजीज चिकन रेस्टोरेंट, पिंच आफ स्पाइस जैसे प्रतिष्ठान बहुत फेमस हैं, एक बार यहाँ जरूर जाएं। अगर आपको रात में कभी भी भूख लगे तो नाई की मंडी बाजार पूरी रात खुला रहता है। यहाँ रात भर चटोरों की भीड़ लगी रहती है।

नोट :: आगरा आने का अनुकूल समय सिंतबर से मार्च के बीच में है। तो फिर स्वागत है आपका आगरा शहर में।

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चिड़ियाघर की दीवारों के पीछे जानवरो का नर्क

आप बचपन मे चिड़ियाघर जरूर गए होंगे। वहाँ विविध जानवरो को देखने का लुफ्त भी आपने जरूर उठाया होगा। लेकिन चिड़ियाघरो के जानवर भी क्या आपको देख के ख़ुश होते है ? या उनके लिए यह एक यातनागृह मात्र ही है। आइए आपको चिड़ियाघरों में जानवरों की दयनीय हालत से रूबरू करवाते है।

1. इंडोनेशिया के सुराबाया चिड़ियाघर में ज़िराफ़ के पेट मे 30 किलो प्लास्टिक निकला। प्लास्टिक में अधिकतर चिड़ियाघर घूमने आए दर्शकों के चिप्स रैपर्स मिले।

2. पानी मे रहने वाले जीव पानी मे तरंगों को अनुभव करते है, चिड़ियाघर में उनको लगातार उच्च तरंग वाले मौहाल में रखा जाता है। इस तनाव की वजह से कई डॉल्फिन पानी से बाहर निकल कर आत्महत्या भी कर चुकी है। आपको बताते चले कि डॉल्फिन को विज्ञान में एक अति समझदार जीव माना गया है।

3. अधिकतर जानवरो को उनके मूल पर्यावरण से बिल्कुल विपरित पर्यावरण में रखा जाता है। हिम तेंदुआ और अन्य बर्फ़ीले इलाको में रहने वाले जानवरो को कम ठंडे स्थान पर रखा जाता है, जिससे वो हमेशा बेचैन रहते है।

4. चिड़ियाघर में रखे गए जानवर अकेलेपन का शिकार रहते हैं। हांथी और कई अन्य जानवर अपने समूह में ही रहना पसंद करते है लेकिन चिड़ियाघर में उनको पूरी जिंदगी अकेले ही एक बन्द बाड़े में बितानी पड़ती है।

 

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दो घंटे से ज्यादा देर से आई ट्रेन तो रेलवे देगा 1 लीटर पानी मुफ्त



हम भारतीयों के जीवन में रेल का बहुत बड़ा महत्व है, हम बचपन से लेकर बुढ़ापे तक रेलगाड़ी से यहां से वहां यात्रा करते ही रहते हैं। और ये उपेक्षा भी करते हैं कि रेलवे हमको बेहतर से बेहतर सुविधाएं मुहैया कराए। अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं तो चिंता ना करें।
यूं तो भारतीय रेलवे ने पहले के मुकाबले वर्तमान समय में अपने यात्रियों को बहुत अच्छी से अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई है, और इसी कड़ी में एक और सुविधा उपलब्ध कराने जा रही है।


यात्रा के दौरान अगर आपकी ट्रेन दो घंटे लेट हो जाती है तो रेलवे आपकी सुविधा को देखते हुए एक लीटर बोतल बंद पानी बिल्कुल मुफ्त देगा। इसके साथ ही एक न्यूज पेपर प्रत्येक यात्री को मुफ्त देगा। बोतलबंद पानी के साथ आपको एक डिस्पोजल गिलास भी दिया जाएगा। लेकिन रेल मंत्रालय के आदेशानुसार ये सुविधा अभी सिर्फ प्रीमियम ट्रेनों के यात्रियों को ही मुहैया कराई जाएगी।


रेल मंत्रालय के आदेशानुसार राजधानी, दुरंतो और शताब्दी ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण परेशानी झेल रहे यात्रियों को ही ये सभी सुविधाएं दी जाएंगी। लेकिन उम्मीद यही लगाई जा रही है कि ये सुविधा और भी अन्य ट्रेनों के ए सी कोच के यात्रियों के लिए भी शुरु की जाएगी।
आपको ये जानकारी भी देते चलें कि प्रिमियम ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सफर शुरू होने के साथ ही बोतलबंद पानी उनकी शीट पर स्वत ही पहुंच जाता है। और अब ये ट्रेनें अगर दो घंटे देर से आ रही है तो प्लेटफार्म पर इंतजार कर रहे यात्रियों को बोतलबंद पानी बिल्कुल मुफ्त मिलेगी। ये एक सराहनीय कदम है।

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